नई उम्मीदें

इस बात में कोई शक नहीं कि नई पीढ़ी पिछले कुछ सालों से मोबाइल, सोशल मिडिया और इससे जुड़े कंटेंट में उलझ कर रह गई.
यही नहीं सोशल मिडिया पर ऐसे-ऐसे खेल चले कि कई परिवारों ने अपने मासूमों को तक खो दिए.ऐसे कई किस्से या घटनाएं हैं.


इस एडिक्शन को छुड़वाने के लिए जहां अस्पताल खुल रहे वहीं इंदौर में एक सुखद तस्वीर भी देखने को मिली. ये तस्वीर नई उम्मीद जगाती है.
ये नज़ारा देखने को मिला इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में.आयोजन स्थल के बाहर ही लगे बुक स्टॉल्स और युवाओं की भीड़ ने दिल खुश कर दिया.


हर स्टॉल्स पर कई लेखकों की पुस्तकें और युवाओं द्वारा पलटते पन्ने आज के परिवेश में सामान्य दृश्य नहीं कहा जा सकता है.


लगभग सभी युवक-युवती किसी कॉम्पिटिशंस एग्जाम की तैयारी,स्कूल-कॉलेज से जुड़े थे. बातों से लगा कि ये फैशन में नहीं बल्कि रियल कुछ पढ़ना चाहते हैं.


ये बात और तब खास लगी जब यूथ के बीच इन दिनों लोकप्रिय लेखक/ कहानीकार दिव्य प्रकाश दुबे पहुंचे.उनके पहुंचते ही युवाओं ने घेर लिया और खरीदी पुस्तकों पर ऑटोग्राफ तक लिए.
बात इतनी सी है, जो मज़ा पढ़ने में है, अहसासों में, कल्पनाओं में हैं वो शायद 59 सेकेण्ड की रील में न हो.वह हो सकता है परंतु अस्थाई है जबकि पढ़ा हुआ हर शब्द आपके मन पर गहरा असर डालता है. शायद रील्स और यूट्यूब से बाहर कुछ समय निकाल कर सिलेबस के साथ साहित्य-संस्कृति को समझने पुस्तकों को खरीदेंगे .


दोस्तों आप भी कोई पुस्तक पढ़कर तो देखिए… बताना कितना सुकून मिला.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *