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जुनून :27 सालों से मुसाफिरों को पिला रहे शुद्ध पानी

साधारण सी कमीज पहने एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन पर पानी पिलाते हुए दिख जाए तो आश्चर्य न कीजिए. सेवा में जुटे व्यक्ति एक उद्योगपति हैं. बरसों से सफर कर रहे मुसाफिरों के गले की प्यास बुझा रहे.

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आयएएस उवाच: उपलब्धि से अहम और बौद्धिक विकृति की यात्रा

कल से मप्र के एक आयएएस साहब का भाषण ट्रेंड कर रहा… ट्रोल भी बहुत हो रहे.जब बात बिगड़ी तो कतिथ नेताओं के तर्ज पर विवादित बोल और फिर मिडिया पर आरोप, तोड़ मरोड़ कर बयानों को पेश किया.बोल कर हाथ झटक दिए.हद्द है साहब, ये आपकी जो उपलब्धि है न घमंड और नफरत भरी मानसिकता के साथ बौद्धिक विकृति वाली यात्रा से ज्यादा कुछ नहीं.आप आरक्षण मांग रहे न… दलित वर्ग को मिल रहे आरक्षण से हमारा विरोध नहीं. पर आपकी इस मांग को लेकर जो शर्त रखी वह बेहद बेहूदी और निंदनीय है. आपने किसी भी समाज की बेटी को क्या समझ लिया….? और दान..!!!! क्या ये पढ़ाया आपको यूपीएससी और परिवारों के संस्कारों ने. हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आप अपनी चेयर पर जब बैठते होंगे तो क्या सोच रहती होगी. कैसे फैसले लेते होंगे.वरिष्ठ (?) आयएएस साहब किसी घर की बेटी आपके बेटे के लिए फालतू नहीं.और हां, आप आरक्षण पर अपने बेहूदे विचार परोसने के पहले आम्बेडकर और उनके सिद्धांत पढ़ लेते. और ज़रा आप उन आपकी दलित बस्तियों में जाकर देख लीजिए जो आपकी क्रीमी लेयर के कारण गांव में मजदूरी कर रहे, उनको वह मुकाम अब तक हासिल नहीं हुआ. आप जैसे लोग ही कब्ज़ा जमाए बैठे हैं.और वापस अपने मुद्दे पर लौटते हैं… आपको ये भी पता होना चाहिए कि कोई भी परिवार अपने बच्चों का अपने चिर-परिचित में रिश्ता करना पसंद करता है, न कि आपको ‘दान’ देने के लिए आतुर रहेगा. आप अफसर होंगे अपने घर के…. मैं उन दलित वर्ग से आए कई ब्यूरोक्रेट्स को न केवल जानता हूं बल्कि उनके यहां हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं. ये मेरे परिचित शायद आपके पद से बड़ी पोस्ट पर हैं, लेकिन उतने ही विनम्र और शालीन.आप थोड़ा उनसे ही संस्कार सीख लीजिए. आपके दिमाग में भरा हुआ जेंडर डिफ़रेंस का ये वायरस आपके ही बिरादरी के लोग ही निकाल फेंकेगे. source : https://ndtv.in/india/ajjaks-mp-ias-santosh-verma-controversial-caste-based-remarks-on-brahmin-daughter-9702126

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स्टील बैंक में बर्तनों की ‘एफडी’, रिटर्न बेनिफिट सुखद पर्यावरण

एक आयएएस लेडी ऑफिसर की सोच ने जिस काम की शुरुआत की आज वो मिशन बन गया. कई राज्यों में इसकी शुरुआत हो रही. अधिकारी और उनके मिशन ‘स्टील बैंक’ की यह है अनूठी कहानी.

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नक्सलियों को नेह की डोरियों से दे रही करारा जवाब

अपने ही सामने परिवार के मुखिया को नक्सलियों ने मार गिराया.मजदूरी छीन ली. एक महिला ने इस क्रूरता का जबाव नेह की डोरियों से दिया. जाबांज महिला की है यह कहानी. “एक पल तो लगा जैसे जीवन ख़त्म हो गया.हमारे ही सामने परिवार के मुखिया मेरे जेठ जैतूराम यादव को नक्सलियों ने मार डाला.मजदूरी के सारे रास्ते बंद कर दिए. पति बेरोजगार हो गए. हमें पुनर्वास केंद्र लाया गया. लेकिन मैंने हार नहीं मानी. Ajeevika Mission Bihan से जुड़कर नई ज़िंदगी शुरू की. अभी समूह के साथ राखियां बना रहे.” Bastar के Bijapur जिले की रहने वाली मेलदेही ने यह बात स्वाभिमान से कही. पर्यावरण और प्रेम से गूंथ रही राखियां  छत्तीसगढ़ के सबसे नक्सल प्रभावित संवेदनशील माने जाने वाले बीजापुर जिला अंतर्गत भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली मेलदेही देवी के परिवार पर तब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा,जब naxalite  हमले में जेठ मारे गए. मेलदेही बताती है -“हमें प्रशासन गोदाम पारा पुनर्वास केंद्र लाया. मैंने Bihan के सुझाव पर Durga self help group बनाया.हमारा समूह बांस और पत्तियों द्वारा पर्यावरणीय राखियां तैयार कर रहीं.मुझे ख़ुशी है सरकारी ऑफिस में भी हमारे स्टाल्स लगाए जा रहे.हमारी आर्थिक स्थिति वापस ठीक होने लगी.” SHG ये महिलाएं मिलकर पुनर्वास केंद्र में ही समूह की गतिविधियां चला रहीं हैं.महिलाओं का कहना है इन राखियों को हमने प्रेम से गूंथ कर बनाई. जंगलों से निकल जीने लगे नया जीवन        CG राज्य के नक्सलवाद को लगातार केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ख़त्म कर रही.Naxalism दम तोड़ रहा,बावजूद पीड़ितों के पुराने घावों पर मरहम लगाने का काम अधिकारी करने में जुटे हुए हैं.बीजापुर के भैरमगढ़ block project manager Rohit Shori कहते हैं-“हमारी मेहनत रंग लाई.दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मेहनत कर खुद को मजबूत बनाया. हमारा प्रयास है समूह द्वारा बनाई गई राखियों को ज़्यादा से ज़्यादा लोग खरीदें.हम स्टॉल्स भी लगवा रहे.”बीजापुर के बीहड़ जंगलों में रहने वाले ये परिवार अब नक्सल प्रभाव और भय से मुक्त होकर नया जीवन जीने लगे. Bijapur Ajeevika Mission की DPM Kalpna Deep कहती हैं -“वर्षों से इन जैसे कई परिवार जंगलों में सुविधाओं से वंचित अपना गुजर बसर कर रहे थे. हमने प्रयास कर इन्हें शासन की प्राथमिक योजनाओं जैसे आधार कार्ड,आयुष्मान कार्ड सहित लाभ दिलाना शुरू किए.यहां तक NRLM से जुड़ीं योजनाओं जैसे CIF और RF जैसी योजनाओं से आर्थिक लाभ और लोन सुविधाओं का भी लाभ दिलवाया जा रहा.”इस जिले में जहां नक्सलवाद अब आखरी सांसे गिन रहा वहीं महिलाओं का आत्मनिर्भर होना नई उम्मीद दिखाई देने लगी है.

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