My Ink

बच्चों ने बनाया संस्कारों का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड !

नज़रिया: परिवार में कोई बच्चा इंग्लिश मीडियम में पढ़कर हिंदी में बात करे तो तोहीन लगती है,ऐसे में बच्चों ने हिंदी तो छोड़िए साहब संस्कृत के सैकड़ों श्लोक कंठस्थ कर सुनाए.रिकॉर्ड तो बनना ही है.संस्कारों को वर्ल्ड रिकॉर्ड. गुजरात के बड़ौदरा में इतिहास रच दिया गया. कहने को तो महंत का 92 वां जन्मोत्सव था. पर न कोई केक कटा और न ही रिसेप्शन के अंदाज़ में मंच पर पहुंचने की होड़…हज़ारों हरि भक्त पर न कोई गुत्थम गुत्था.आकाश में रौशनी की अनूठी छटां बिखरती रही. BASP स्वामी नारायण संस्था द्वारा गुरु हरि महंत स्वामी जन्म जयंती महोत्सव में अद्भुत नज़ारा देखने को मिला.यह असाधारण था. संस्था से जुड़े बच्चों ने सतसंग दीक्षा ग्रंथ के 315 संस्कृत के श्लोकों की प्रस्तुति दी. महज 3 से 13 साल के बीच के 15 हज़ार 666 शामिल इन बच्चों का उच्चारण संयमित और शुद्ध था. आखिरकार वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के डायरेक्टर स्वप्निल डांगरिकार ने यह रिकॉर्ड सर्टिफिकेट समकालीन हिन्दू ग्रन्थ पाठ महंत स्वामी को सौंपा. यह सामान्य खबर नहीं हो सकती. सजाया उम्मीदों का नया आकाश दुनिया के न जाने कितने देशों में इस भव्य आयोजन का लाइव प्रसारण हुआ. इसमें संस्कारों और अध्यात्म की खुश्बू के साथ उम्मीदों का नया आकाश सजा दिया गया.दरअसल बड़ौदरा में हुए इस आयोजन में सिर्फ यह एक रिकॉर्ड ही नहीं बना,बल्कि यहां की प्रस्तुतियों ने देश को उस समय नई उम्मीद दी,जब युवा हो या समाज नकारात्मकता के माहौल से गुजर रहा हो.खास बात इस कार्यक्रम में गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल और मप्र के सीएम डॉ.मोहन यादव विशेष रूप से मौजूद रहे.महंत स्वामी ने 2024 की दीपावली पर सतसंग ग्रंथ के 315 श्लोक को कंठस्थ करवाने की इच्छा जताई.देखते ही देखते बच्चे एक या दो नहीं बल्कि हज़ारों में संस्कृत के दीवाने हो गए.इस उपलब्धि में मप्र के उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया जो हाल ही में सामूहिक गीता पुरुषोत्तम श्लोक का रिकॉर्ड बनाया गया था. कलाम के किस्सों से हुए भाव विभोर, ज़िंदगी में भर गए नए रंग इस अयोजन में प्रेरक प्रसंगों ने सभा स्थल को और ऊर्जा से भर दिया. देश के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने प्रमुख स्वामी महाराज से 8 बार मुलाकत की.अपनी लिखी पुस्तक में उन्होंने अहसास किया कि पदों पर रहते कई लोगों से मिला परंतु स्वामी महाराज से मिलाकर जीवन में सोच का तरीका बदल गया.यही नहीं टीवी कलाकार और हरि भक्त दिलीप जोशी (जेठालाल) ने बताया कैसे मासूम मनन मोदी का जीवन बदला. सतसंग दीक्षा ग्रंथ के श्लोक क्रमांक 31-32 और 26-27 को समझाते हुए जीवन में सामाजिक परिवर्तन के उदाहरण प्रस्तुत किए. अनीति,उपेक्षा हो या व्यसन जैसी कुरुति…केवल छह साल की एक बेटी द्वारा कई परिवारों के सदस्यों के व्यसन छुड़ाने का अभियान हो,का ज़िक्र किया गया.इन सभी प्रसंगों से साबित हुआ कि यहां बाल प्रवृति संस्कारों को नया जन्म मिला.मानव सेवा और समाज सेवा के लिए आदिवासी इलाकों में मोबाइल विद्यालय संचालित करने की घोषणा की गई.जो शिक्षा का अलख जगाएगी.मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने गुरु परंपरा की व्याख्या की,वहीं सीएम पटेल ने शुभकामनाएं दी. महंत स्वामी ने ईश्वर से जुड़ना और अध्यात्म का उल्लेख कर अपने आशीर्वचन दिए.इस आयोजन ने साबित किया संस्कार ही जीवन जीने की शैली तय करते हैं. वर्ल्ड रिकॉर्ड ग्रहण करते महंत स्वामी और सीएम पटेल और डॉ.यादवआयोजन में मौजूद हरि भक्त और अन्यजय स्वामी नारायण आरती का दृश्य

Read More »

मिशन को मिला सम्मान,रविवार बना सिरमौर

किसी मजबूर महिला के ज़िंदगी के संघर्ष को लिखना आसान नहीं, इसके साथ उसकी मेहनत और सफलता की कहानी को गढ़ने वाली महिला दास्तां को लिखना ही मिशन है.रविवार विचार का मिशन सिरमौर बन गया.

Read More »

गीता ज्ञान प्रतियोगिता: 100 में से 94 अंक प्राप्त : रिज़ल्ट विफल !

मैं अपनी पोस्ट के साथ एक मार्कशीट शेयर कर रहा हूं. यह एक बेहद होनहार छात्र की मार्कशीट है. पहले इसे देख लीजिए. देखा आपने ? 100 पूर्णांक में से 94 अंक हासिल किए. इस छात्र को बताया गया कि आप विफल हैं. अनुत्तीर्ण हैं.ये तो हद्द हो गई… अभी सरकार और शासन के विभाग गीता श्लोक और गीता ज्ञान प्रतियोगिता पर जोर दे रहा है. इसी क्रम में प्रदेश के न जाने कितने विद्यार्थियों ने अपनी नियमित पढ़ाई, स्कूल से इतर ये अध्ययन किया. गीता के श्लोक कंठस्थ किए. ऑनलाइन परीक्षा में हिस्सा लिया. 25 नवंबर को परीक्षा आयोजित हुई. रिज़ल्ट आपके सामने है, जो 1 दिसंबर को जारी हुआ.सवाल ये उठता है कि ये परीक्षा माना कि स्कॉलरशिप के लिए थी. कुछ बच्चे 100 में 100 या इसके आसपास लाए होंगे. उनको बधाई भी.तरस आ रही है इस बात के लिए कि सरकार एक तरफ जन्माष्टमी से लगा कर भगवान श्रीकृष्ण और गीता को जन-जन तक पहुंचाने में लगी है. ऐसे में गौर करने वाली बात ये है कि शासन के आयोजन कर्ता-धर्ता एक होनाहर बच्चे को मायूसी उपहार में दे रहे. ऐसे हज़ारों बच्चों के यहां ऐसी मार्कशीट भेजी गई. पूर्ण तो सिर्फ श्रीकृष्ण हैं आयोजनकर्ताओं समझिए…ऐसी मान्यता है कि गीता जीवन जीने की शैली है. जीवन का सार है. भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- “जीवन में सफलता और असफलता कुछ नहीं होती. सिर्फ कर्म है जो आपको परिणाम स्वरूप दिखाई देते हैं.”जिसने गीता को उपदेश के रूप में सर्वज्ञ समझाया वही भगवान है. इस धरती पर कोई पूर्ण नहीं. सिवाय भगवान श्रीकृष्ण के. महाभारत के पात्र और कृष्ण के प्रिय अर्जुन भी नहीं…और जब कि नई शिक्षा नीति अंकों के इस मकड़जाल से निकालकर सिर्फ ग्रेड देने की बात कही जा रही, ऐसे में ये विभाग क्या दर्शाना चाहता है. एक बच्चे के 94 अंक हासिल करने के बाद उसे “परिणाम-विफलता” ‘क्षमा करें आप उत्तीर्ण न हो सके’ कहा. माफ़ तो आयोजनकर्ता आप हमें करिए. आप जैसे लोग ही मुख्यमंत्री और उनकी योजनाओं को ऐसे शब्दों के माध्यम से विफल करते हैं और छवि धूमिल करते हैं.* * * *मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी,इस प्रतियोगिता में जो चयनित हुए उन्हें सफल होने की सूचना देकर कर बाकी सभी को प्रोत्साहित किया जाना था, न कि अनुत्तीर्ण के मायने समझाने थे.आप समझ सकते हैं 94 नंबर की अहमियत. विश्वास है आप इस परिणाम घोषणा की शैली को संज्ञान में लेंगे, और संबंधित से सवाल-जवाब करेंगे.

Read More »

अन्नकूट

पिछले दिनों दीपोत्सव और गोर्धन पूजन पर्व संपन्न हुए।इस पर्व के साथ देश के कई हिस्सों में स्थित धार्मिक स्थल मंदिर व अन्य जगह “अन्नकूट” का आयोजन भी हुआ। मंदिरों में अन्नकूट आयोजन के प्रति आस्था और भव्यता देखते बनती है।श्रद्धालु सैकड़ों की संख्या में हैं जो गोर्धन पूजन,मंदिरों में अन्नकूट के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने जाते हैं।परंतु इनमें कई श्रद्धालु ऐसे भी होंगे जो अन्नकूट के इस भाव और पौराणिक परंपरा को न जानते हों। मेरी मुलाकात एक 10 वीं में अध्ययनरत छात्र दक्षेश पटेल,इंदौर से हुई।अध्यात्म-अध्ययन में रुचि रखने वाले दक्षेश ने बहुत सुंदर तरीके से “अन्नकूट” के महत्व को समझाया। मास्टर दक्षेश कहते है-“पौराणिक मान्यताओं में,उपनिषद में उल्लेखित है अन्नकूट..और महत्व।वृंदावन में कुछ भक्तों ने इंद्र देवता के पूजन करने को कहा।बताया जाता है भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन वासियों को कहा-‘आप गोवर्धन की पूजा कीजिए।’तभी से गोबर के लेप से तैयार गोवर्धन की पूजा और गाय-बैल की पूजा का महत्व बताया।साथ ही आप ईश्वर के सामने आस्था से अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाइए।व्याख्या है-“अन्नकूट यानी इस शब्द में कूट का अभिप्राय पहाड़/पर्वत…”अन्न का पर्वत”।ईश्वर के समक्ष एक ऐसी पर्वतनुमा रचना जो विभिन्न अन्न(वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई तरह के व्यंजन)से तैयार की गई हो।ये व्यंजन अन्न हरि भक्त,परिवार ही तैयार अमूमन करते हैं।इस अति आकर्षक तरीके से सजाकर भव्यता दी जाती है।पूजा के बाद अन्नकूट भोजन प्रसादी का वितरण..।इस प्रसाद को पूर्ण ग्रहण किया जाता है।छोड़ा नहीं जाता। इस पूरे प्रसंग में दो बात समझ आई।पहला ईश्वर के प्रति प्राकृतिक कृतज्ञता।इस समय अन्न की भरपूर आवक के साथ ईश्वर के माध्यम से उत्सव का स्वरूप दिया गया।दूसरा वृंदावन से शुरु हुई सम्भवतः यह परंपरा आज विश्वव्यापी हो गई। दक्षेश ने अपनी अपेक्षाकृत कम उम्र होने के बावजूद अन्नकूट और उसके महत्व को विस्तृत सुनाया।साथ ही इंसान,ईश्वरीय अवतार,ईश्वर,माया,ब्रम्ह और परम् ब्रम्ह की साधना…इस धार्मिक यात्रा को बखूबी बताया।ये पर्व, ये उत्सव और नई पीढ़ी का रुझान एक सुखद संकेत है।स्वामी नारायण भगवान की कृपा बनी रहे।

Read More »