मैं अपनी पोस्ट के साथ एक मार्कशीट शेयर कर रहा हूं. यह एक बेहद होनहार छात्र की मार्कशीट है.
पहले इसे देख लीजिए.
देखा आपने ?
100 पूर्णांक में से 94 अंक हासिल किए.
इस छात्र को बताया गया कि आप विफल हैं. अनुत्तीर्ण हैं.
ये तो हद्द हो गई… अभी सरकार और शासन के विभाग गीता श्लोक और गीता ज्ञान प्रतियोगिता पर जोर दे रहा है. इसी क्रम में प्रदेश के न जाने कितने विद्यार्थियों ने अपनी नियमित पढ़ाई, स्कूल से इतर ये अध्ययन किया. गीता के श्लोक कंठस्थ किए. ऑनलाइन परीक्षा में हिस्सा लिया. 25 नवंबर को परीक्षा आयोजित हुई.
रिज़ल्ट आपके सामने है, जो 1 दिसंबर को जारी हुआ.
सवाल ये उठता है कि ये परीक्षा माना कि स्कॉलरशिप के लिए थी. कुछ बच्चे 100 में 100 या इसके आसपास लाए होंगे. उनको बधाई भी.
तरस आ रही है इस बात के लिए कि सरकार एक तरफ जन्माष्टमी से लगा कर भगवान श्रीकृष्ण और गीता को जन-जन तक पहुंचाने में लगी है. ऐसे में गौर करने वाली बात ये है कि शासन के आयोजन कर्ता-धर्ता एक होनाहर बच्चे को मायूसी उपहार में दे रहे.
ऐसे हज़ारों बच्चों के यहां ऐसी मार्कशीट भेजी गई.
पूर्ण तो सिर्फ श्रीकृष्ण हैं

आयोजनकर्ताओं समझिए…
ऐसी मान्यता है कि गीता जीवन जीने की शैली है. जीवन का सार है. भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- “जीवन में सफलता और असफलता कुछ नहीं होती. सिर्फ कर्म है जो आपको परिणाम स्वरूप दिखाई देते हैं.”
जिसने गीता को उपदेश के रूप में सर्वज्ञ समझाया वही भगवान है.
इस धरती पर कोई पूर्ण नहीं. सिवाय भगवान श्रीकृष्ण के. महाभारत के पात्र और कृष्ण के प्रिय अर्जुन भी नहीं…
और जब कि नई शिक्षा नीति अंकों के इस मकड़जाल से निकालकर सिर्फ ग्रेड देने की बात कही जा रही, ऐसे में ये विभाग क्या दर्शाना चाहता है. एक बच्चे के 94 अंक हासिल करने के बाद उसे “परिणाम-विफलता” ‘क्षमा करें आप उत्तीर्ण न हो सके’ कहा.
माफ़ तो आयोजनकर्ता आप हमें करिए. आप जैसे लोग ही मुख्यमंत्री और उनकी योजनाओं को ऐसे शब्दों के माध्यम से विफल करते हैं और छवि धूमिल करते हैं.
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मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी,
इस प्रतियोगिता में जो चयनित हुए उन्हें सफल होने की सूचना देकर कर बाकी सभी को प्रोत्साहित किया जाना था, न कि अनुत्तीर्ण के मायने समझाने थे.
आप समझ सकते हैं 94 नंबर की अहमियत. विश्वास है आप इस परिणाम घोषणा की शैली को संज्ञान में लेंगे, और संबंधित से सवाल-जवाब करेंगे.