अपने दौर के बादशाह और सदाबहार हीरो धरम पाजी न रहे. किसी भी कंट्रोवर्सी से दूर अपने अंदाज़ के लिए मशहूर अभिनेता का जाना दुखद है.
उनकी यादगार फिल्मों के ज़रिये नई आने वाले पीढ़ी हमेशा जीती रहेगी.
मेरा सौभाग्य है कि धर्मेंद्र और उनके परिवार से इंटरव्यू करने और करीब से मिलने का मौका मिला.
चमक-धमक से दूर ठेठ देशी पंजाबी अंदाज़ सदैव उनमें दिखाई दिया. उनका अपना इश्क़ और शायराना अंदाज़ भी उनके अंदाज़ को और लाजवाब बना देता था.
मुलाकात और फिर उनके जीवन से जुड़े सवालों के साथ परिवार की मूवी “यमला पगला दीवाना” पर कुछ सवाल और जवाब हुए.
इंटरव्यू के सिलसिले और साथ चाय के बाद मैंने इजाजत मांगी.
ठेठ वही अंदाज़ में धरम पाजी ने हाथ पकड़ा और कहा – “अभी कैसे जाओगे पुत्तर…अभी तो रोटी-शोटी खाना और फिर शूट देख कर जाना. और अभी सनी आने वाला है, मिलकर जाना.”
मैं अभिभूत था. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि दुनिया के चहेते और अपने ज़माने के हिट कलाकार मेरे बिलकुल न केवल करीब है बल्कि बिंदास बात का अवसर भी देख सकता है. ये बानगी है एक घण्टे की मुलाकात के अंश की.
आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कितने सरल थे धरम पाजी. एक ज़िंदादिल इंसान… हमने कई बार सोशल मिडिया पर उन्हें फॉर्म हॉउस पर देखा. कुछ आयोजनों में भी.
ये स्मृति शेष और शख्सियत को लिखने का मकसद सिर्फ इतना है कि आजकल कई एक्टर और ऐक्ट्रेस एक-आध मूवी के हिट होने पर प्रशंसकों को ठेंगा दिखाने लग जाते हैं. पिक्स/क्लिप्स के लिए पहुंचे मीडिया साथियों को उनके बाउंसरों से ऐसे धक्के लगवाते जिसे शायद जलील होना भी कहा जा सकता है. ये वही कलाकार हैं जब तक फिल्म रिलीज़ न होती तब तक आप जहां कहें वहां ठुमके लगाने को तैयार हो जाते हैं.
इससे ठीक उलट कई हिट फिल्मों के हीरो सरल और सादगी के लिए याद आएंगे. और कड़वी याद तो यह भी आएगी कि सांसों के थमने के पहले उतावले कुछ चैनल्स और सोशल मिडिया ने उनको अलविदा कह दिया. इस ब्रेकिंग की होड़ में शर्मिदा होना भी लाज़मी है. हमने देखा कैसे धैर्यता खोते ही मीडिया के पैर फिसलते हैं.
खैर….
ऐसे हालातों में महान कलाकार धर्मेंद्र पाजी का जाना एक सदी, एक युग का ख़त्म हो जाना है.
शब्दों की यह विनम्र श्रद्धांजलि… बहुत याद आओगे वीरू पाजी.