जुनून :27 सालों से मुसाफिरों को पिला रहे शुद्ध पानी

साधारण सी कमीज पहने एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन पर पानी पिलाते हुए दिख जाए तो आश्चर्य न कीजिए. सेवा में जुटे व्यक्ति एक उद्योगपति हैं. बरसों से सफर कर रहे मुसाफिरों के गले की प्यास बुझा रहे.

छोटा सा विचार बना जुनून,उठाते 24 लाख का सालाना खर्च 

आप जब भी पश्चिम रेलवे के नीमच रेलवे स्टेशन पर जाएं या वहां से निकलें. आपको ओमप्रकाश अग्रवाल और उनकी टीम पानी की ट्रॉली के साथ पानी पीने का आग्रह करते नज़र आ जाएंगे.

अग्रवाल का छोटा सा विचार ऐसा जुनून बना कि अनवरत 27 सालों से एडवांस प्याऊ निःशुल्क संचालित कर रहे.
समाजसेवी ओमप्रकाश अग्रवाल कहते हैं- “मेरे दादा को मैंने बरसों पहले जरूरतमंदों को पानी पिलाते देखा.यही सेवाभाव मन में बस गया. 1998 में लगभग 10 साथियों के साथ इस काम की बुनियाद रखी. और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को पानी पिलाने लगे.देखते ही देखते लोग जुड़े और आधुनिक मशीनों के साथ शुद्ध RO पानी यात्रियों को उपलब्ध कराने लगे.इस काम में लगभग 24 लाख रुपए सालाना खर्च समाजसेवी ही उठाते हैं.”
नीमच रेलवे स्टेशन पर सेवादार राहुल कहते हैं- “हम लगभग 8 घंटे स्टेशन पर सेवाएं देते हैं. हमको इस काम में बहुत संतुष्टि मिलती है.”

शहर में 4 एडवांस यूनिट और 50 पॉइंट पर मिलता पानी 

नीमच की जल सेवा समिति में 70 सक्रीय सदस्य हैं जो इस खर्च को स्वैछिक उठाते हैं. शहर में रेलवे स्टेशन के अलावा एक यूनिट जिला अस्पताल और 2 यूनिट बस स्टैंड पर लगाई गई. इन यूनिट को स्थापित करने में लगभग एक करोड़ रुपए का खर्च भी समाजसेवियों ने ही वहन किया. 
समाजसेवी ओमप्रकाश बताते हैं- “रेलवे स्टेशन पर गर्मी के दिनों में दस हज़ार लीटर पानी की खपत प्रतिदिन होती है. जबकि अन्य मौसम में पानी की खपत कुछ कम होती. मुझे ख़ुशी है कि रेलवे के स्टाफ ने हमें इस काम के लिए बिजली निशुल्क उपलब्ध करवाई. हर प्लेटफॉर्म पर हमारी ट्रॉली और सेवादार सेवाएं देते हैं. सौ से ज्यादा सेवादार इस काम में अलग-अलग जुटे हुए हैं.”

इस काम को लेकर इंदौर जा रहे यात्री का कहना है कि पानी शुद्ध और मौसम अनुसार मिल रहा. यह काम अनूठा है.
इस काम के लिए कई समाजसेवी गुमनाम जुड़े हैं. इनमें पारस भंसाली, सुनील रस्तोगी, कृष्ण कुमार गट्टानी, बंशीलाल प्रजापत , प्रकाश समदानी और पारस सगरावत शामिल हैं जो समिति में सक्रीय भूमिका निभा रहे है. शहर में 300 सदस्य दानदाता की भूमिका निभा कर इस मिशन को सफल बना रहे है. कोई भी मौसम हो पानी शुद्ध और अपनत्व की मिठास घुली है.
यही नहीं ये समाजसेवी एक लाख रुपए के स्वेटर ग्रामीण अंचल में बच्चों को वितरित कर चुके है. इसी समिति ने जिला अस्पताल में 12 यूनिट डायलेसिस को स्थापित करवाने में सहयोग किया.
यह समिति उस समय चर्चा में आई जब कोविड काल में भी जिला प्रशासन के साथ सेवाएं देने से पीछे नहीं हटे थे.  

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