कल से मप्र के एक आयएएस साहब का भाषण ट्रेंड कर रहा… ट्रोल भी बहुत हो रहे.जब बात बिगड़ी तो कतिथ नेताओं के तर्ज पर विवादित बोल और फिर मिडिया पर आरोप, तोड़ मरोड़ कर बयानों को पेश किया.बोल कर हाथ झटक दिए.
हद्द है साहब, ये आपकी जो उपलब्धि है न घमंड और नफरत भरी मानसिकता के साथ बौद्धिक विकृति वाली यात्रा से ज्यादा कुछ नहीं.
आप आरक्षण मांग रहे न… दलित वर्ग को मिल रहे आरक्षण से हमारा विरोध नहीं. पर आपकी इस मांग को लेकर जो शर्त रखी वह बेहद बेहूदी और निंदनीय है. आपने किसी भी समाज की बेटी को क्या समझ लिया….? और दान..!!!! क्या ये पढ़ाया आपको यूपीएससी और परिवारों के संस्कारों ने. हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आप अपनी चेयर पर जब बैठते होंगे तो क्या सोच रहती होगी. कैसे फैसले लेते होंगे.
वरिष्ठ (?) आयएएस साहब किसी घर की बेटी आपके बेटे के लिए फालतू नहीं.
और हां, आप आरक्षण पर अपने बेहूदे विचार परोसने के पहले आम्बेडकर और उनके सिद्धांत पढ़ लेते. और ज़रा आप उन आपकी दलित बस्तियों में जाकर देख लीजिए जो आपकी क्रीमी लेयर के कारण गांव में मजदूरी कर रहे, उनको वह मुकाम अब तक हासिल नहीं हुआ. आप जैसे लोग ही कब्ज़ा जमाए बैठे हैं.
और वापस अपने मुद्दे पर लौटते हैं… आपको ये भी पता होना चाहिए कि कोई भी परिवार अपने बच्चों का अपने चिर-परिचित में रिश्ता करना पसंद करता है, न कि आपको ‘दान’ देने के लिए आतुर रहेगा. आप अफसर होंगे अपने घर के….
मैं उन दलित वर्ग से आए कई ब्यूरोक्रेट्स को न केवल जानता हूं बल्कि उनके यहां हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं. ये मेरे परिचित शायद आपके पद से बड़ी पोस्ट पर हैं, लेकिन उतने ही विनम्र और शालीन.
आप थोड़ा उनसे ही संस्कार सीख लीजिए. आपके दिमाग में भरा हुआ जेंडर डिफ़रेंस का ये वायरस आपके ही बिरादरी के लोग ही निकाल फेंकेगे.

source : https://ndtv.in/india/ajjaks-mp-ias-santosh-verma-controversial-caste-based-remarks-on-brahmin-daughter-9702126